कबूतर का चश्मा,kabootar ka chashma

कबूतर का चश्मा
कबूतर का चश्मा

 पि छले दिनों प्रदूषण की वजह से राजा कबूतर को साफ

दिखाई नहीं देता था । आंखों में जलन भी थी । दाना चुगने

जाने में काफी परेशानी थी इसलिए उसने डॉक्टर के पास

जाकर चश्मा ले लिया था । अब वह खुश था । रोज की तरह

उस दिन वह सोकर उठा , चश्मा लगाया और उड़ चला दाना

चुगने किंतु वह अधिक दूर तक नहीं उड़ पाया । उसे पहले से

भी अधिक धुंधला दिख रहा था । वह आम के एक पेड़ पर जा
बैठा । चश्मा उतारकर अपने परों से साफ किया और पुनः

पहना किंतु अभी भी उसे साफ नहीं दिख रहा था । कहीं

आकाश में उसकी किसी चील आदि से टक्कर न हो जाए यही
सोचकर वह परेशान मन से अपने घोंसले में वापिस लौट आया

 इतनी जल्दी राजा को वापिस आया देख चिनी चिड़िया ने

पूछा , ' क्या बात है राजा ? तुम दाना चुगने नहीं गए ? ' गया

था किंतु बीच रास्ते से मुझे वापिस आना पड़ा । आज मुझे

बहुत धुंधला दिख रहा है । लगता है चश्मे का नेबर बढ़ गया है ।
 ' दुखी स्वर में राजा बोला । ' नंबर कैसे बढ़ गया तुम तो हर

समय चश्मा लगाए रखते हो । ' ' अरे नंबर नहीं बढ़ेगा तो क्या
होगा ? तुम लोग देखते नहीं हो , इंसानों ने वातावरण को

कितना प्रदूषित कर दिया है । जंगल काट काटकर ऊंची -

ऊंची बिल्डिंग बना डाली । यहां वहां पड़े कूड़े के ढेर और

पॉलीथिन का उपयोग , मिलों और फैक्ट्रियों से निकलता धुंआ ,
उस पर सड़कों पर दौड़ते वाहनों की रेलमपेल जिनकी संख्या

दिनोंदिन बढ़ रही है । इन्होंने वातावरण को जिंदा रहने लायक
कहां छोड़ा है ? तोता क्रोध से बोला । वहीं बैठी मैना बोली , '

सच कहते हो दोस्त , पहले जैसी स्वच्छ हवा अब कहां रही ?

यहां तक कि नदियों का पानी भी कड़वा हो चुका है और यह

सब इंसानों की वजह से हुआ है । ' ' ये बातें बाद में करेंगे ।

पहले राजा को डॉक्टर को दिखाकर चश्मे का नंबर ले लेना

चाहिए । ' ब्लैकी कौवे की बात का सबने समर्थन किया । ' मैं

देखकर आता हूं कि डॉक्टरका क्लिनिक खुला है या नहीं ।

बाद में राजा को लेकर जाएंगे । कौवा उड़ गया । थोड़ी देर

बाद वह लौटा और बोला , " डॉक्टर का क्लिनिक बंद है ।

जल्दी खुलेगा भी नहीं । तभी - तभी वहां आए बंदर ने कौवे

की बात सुनी और बोला , ' क्लिनिक क्या सभी कुछ बंद है ।

तुम लोगों को क्या पता नहीं है कि सिर्फ हमारे देश में ही नहीं

पूरे विश्व में कोरोना वायरस फैला हुआ है । लाखों लोग मर

चुके हैं । लाखों संक्रमित हैं जिनका इलाज चल रहा है ।

पिछले कई दिनों से देशभर में लॉकडाउन है । ' ' अच्छा ,

इसीलिए लोग घरों से नहीं निकल रहे । सड़कें सुनसान पड़ी हैं ।
 ' ' हां , अब राजा दाना कैसे चुगने जाएगा ?

बंदर ने चिंता जताई । ' हम सभी बारी - बारी से उसके लिए

दाना लाएंगे । हम इंसानों की तरह स्वार्थी नहीं होते जो बुरे

समय में साथ छोड़ देते हैं । ' मिटू बोला । अगले दिन से सारे

पक्षी राजा के लिए दाना लाने लगे । सुबह सवेरे अपना दाना

घोंसले में रखकर नीलू मैना राजा के लिए दाना लेने पुनः पहुंच
गई तो वहां खड़े बंटी कुत्ते ने कहा , ' अभी तुम खाना लेने

आई थीं फिर से आ गई । आजकल खाने की वैसे भी कमी है ।
' ' मैं इस बार राजा के लिए खाना लेने आई हूं । प्रदूषण की

वजह से उसे ठीक से दिखाई नहीं दे रहा । ' ' दिखाई न देने

की कुछ और वजह होगी नीलू । आजकल प्रदूषण बिल्कुल

नहीं है ।

 वातावरण साफ है । नदियों का जल भी स्वच्छ हो गया है ।

पिछले दिनों मुंबई के समुंद्र में दो डॉल्फिन भी देखी गई थीं । '

' अरे वाह , चलो यह बात मेरे सभी मित्रों को भी बता दो ।

नीलू के साथ बंटी श्वान बगीचे में पहुंचा । उसने सारी बात

बताकर कहा , ' तुम लोगों ने नोट नहीं किया , पहले आसमान
ग्रे रंग का दिखता था और आजकल नीला दिखाई देता है ।

सारे पशु पक्षियों ने अपनी गर्दन ऊपर उठाई और खुशी से

चिल्लाए , ' तुम ठीक कह रहे हो दोस्त । इतना सुंदर नीला

आसमान हमने सालों से नहीं देखा था । राजा बोला , ' मुझे तो

अब भी धुंधला ही दिख रहा है । ' ' तुम अपना चश्मा उतारो ।

' बंटी बोला । राजा ने ज्यों ही चश्मा उतारा , खुशी से

चिल्लाया , ' अरे , मुझे बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा है । ' सारे
पशु पक्षियों में खुशी की लहर दौड़ गई । बंटी बोला , ' तुम्हारी

आंखें खराब नहीं हैं । पहले प्रदूषण के कारण तुम्हें धुंधला

दिखाई देता था । ' यकायक राजा पुनः उदास हो गया । उसने

कहा , ' जब कोरोना वायरस समाप्त हो जाएगा । लॉकडाउन

खुल जाएगा तब फिर से इंसान अपने पुराने ढर्रे पर चल पड़ेगा
और पुनः वातावरण प्रदूषित हो जाएगा ? ' ' मेरे खयाल से

अब ऐसा नहीं होगा । इंसान ने अपनी गलतियों की बहुत भारी
कीमत चुकाई है । अब वह प्रकृति से खिलवाड़ करने की भूल

नहीं करेगा । ' बंदर की बात पर सब आश्वस्त हो गए ।

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